सोनभद्र/चोपन। थाना चोपन अंतर्गत बैरियर निवासी चाय की दुकान चलाने वाले ओम प्रकाश मोदनवाल जिनकी मृत्यु 30.06.2023 व उनके पत्नी माया देवी की मृत्यु 16.11.2023 को ग़रीबी के आभाव में बीमारी का सही तरीके से उपचार नहीं करा पाने के कारण दोनों लोगों का मृत्यु हो गया। जिसके बाद दो पुत्र व एक पुत्री बड़ा पुत्र 16 वर्ष,छोटा पुत्र 15 वर्ष, पुत्री 23 वर्ष के सर से माता बाप का साया उठ गया माने जैसे इन बच्चों के सर पर पहाड़ टूट गया हो। पढ़ने का भी मन था बच्चों का प्रवेश होने के बाद भी अगर विद्यालय जायेंगे तो घर का खर्च कैसे चलेगा सोचने लगे इतना सब कुछ होने के बाद भी कोई भी मदद करने आगे नहीं आया। दर बदर ठोकर खा रहें हैं घर का खर्च कैसे चले जिसको लेकर भाई बहन काफी परेशान रहने लगे जिसके बाद आपस में विचार बनाया छोटा भाई घर पर चाय की दुकान खोल लिया बड़ा भाई पास में मजदूरी करने लगा अभी ठीक से वयस्क भी नहीं हुए लेकिन जिम्मेदारियों के अहसास ने उन्हें अभिभावक बना दिया है। बड़ी बहन घर के अंदर का काम काज भाईयों का जिम्मेदारी एक माँ और पिता बन कर निभाने लगी। भाई बहन अब जीवन की कठिन सच्चाइयों से लड़ रहे हैं, और इस कठोर संघर्ष में एक दूसरे का सहारा बने हुए हैं। बीते कुछ दिन पूर्व विद्युत विभाग द्वारा बिजली का बिल प्राप्त हुआ की आपका बिल 216438 रूपये कनेक्शन संख्या (0677379274)कई वर्ष से बकाया हैं इसको तत्काल जमा करवाये नहीं आपका बिजली कट जायेगा। एक तरह पूरा दिन मेहनत करने के बाद जो पैसा घर में आ रहा है उससे ख़र्च चला पाना मुश्किल हैं। दूसरी तरफ विद्युत विभाग का बिल आने के बाद काफ़ी परेशानी बढ़ गया है। इस पुरे मामले की जानकारी लेकर राकेश केशरी सामाजिक कार्यकर्त्ता ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी को पत्र लिख कर यह मांग किया की सरकार द्वारा माँ बाप के न रहने की स्थिति में सरकार द्वारा चलायी जा रही योजना का लाभ इन नाबालिक बच्चों को दिया जाये जिससे की अपनी शिक्षा ग्रहण करते हुये अपना जीविका बिना मजदूरी किये चला सके, विद्युत विभाग द्वारा आये हुये 216438 रूपये के बिजली बिल को यें नाबालिक बच्चें जमा करने में सक्षम नहीं हैं। इनकी बिजली बिल माफ किया जाये,जिला पूर्ति विभाग द्वारा इनका अंत्योदय राशन कार्ड बनवाया जाये,अनाथ नाबालिक बच्चों के शिक्षण का खर्च सरकार उठाये।
Sonbhadra news: सर पर नहीं है माता पिता का साया,बिजली बिल का लाखों बकाया,भावुक कर देगी अनाथ बच्चों की कहानी
byडी.डी.यादव,(प्रधान संपादक)
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